गीता ये वो परिचय है जो सभी से परिचित है, और इसे मैं अपने तरीके से आप सब से परिचित करवाना चाहता हूँ….
जय श्री कृष्ण… राधे राधे…. मैं अनिल कुमार दुबे, आप सभी का स्वागत और अभिनंदन करता हूँ, आप के अपने इस चैनल इस ब्लॉग मैं।
गीता के परिचय से पहले मैं आप को दो और लोगो से परिचित करवता हूँ पहले, दोनों व्यक्ति भारतीय मूल के ब्रिटेन के निवासी है, और दोनों किसी एक बात से, किसी एक तार से जुड़े हुए है… वो तार वो माध्यम है गीता… एक व्यक्तित्व है, श्री मान ऋषि सुनक, दूसरी है, सुश्री प्रीति पटेल, ये दोनों गीता नामक उस पवन धागे से बंधे है जो जीवन को आप के जीवन को सफलताओ के अनुकूल बना देता है श्री ऋषि सुनक आज ब्रिटेन के वित्तमंत्री है, और सुश्री प्रीति पटेल जी ग्रहमंत्री… राधे राधे….
हा तो आते है अपने मूल टॉपिक पर, गीता का परिचय मेरे नज़रिए से… श्रीमदभगवदगीता जगत के पालन करता श्री विष्णु जी के सम्पूर्ण अवतार श्री कृष्ण के मुख से अवतरित हुई, वैसे तो हम सभी जानते है गीता अर्जुन को श्री कृष्ण ने सुनाई और गीता का ज्ञान दिया, लेकिन क्या आप को पता है गीता के ज्ञान का प्रथम लाभ किसी को मिला, नही वो अर्जुन नही है, वो हमारे जीवन मे प्रकाश लेन वाले श्री सूर्य जी महाराज है, हा श्री कृष्ण जी ने सर्वप्रथम गीता का ज्ञान सूर्य देवता को दिया था… अर्जुन को तब दिया जब अर्जुन इस महान ज्ञान को हासिल करने के एकदम योग्य हो गए थे या उन्हें इस ज्ञान की सबसे अधिक आवश्यकता थी…. इसके अलावा गीता सर्वप्रथम दो और लोगो ने सुनी, एक थे संजय और दूसरे धृतराष्ट्र…
हमारे महान गणितज्ञ श्रीमान आर्यभट्ट जी के अनुसार महाभारत का युद्ध 3137 ईशा पूर्व हुआ था, वर्तमान मे शक संवत 1940 चल रहा है, तो लगभग आज से 5116 वर्ष पूर्व महाभारत के युद्ध के मैदान, परमपूज्य और देवताओं के लिए भी आकर्षण और पाने की कामना वाली भूमि जो हरियाणा मे इस्थित है, “कुरुक्षेत्र”… कुरुक्षेत्र मे हुआ था। वो युद्ध कम यज्ञ ज्यादा था, पाप को मिटाने का यज्ञ, वातावरण को पुण्य की खुश्बू से सुगंधित करने का यज्ञ… छल पर निश्छल की विजय का यज्ञ….और इसको सम्पन्न श्री कृष्ण ने करवाया….
इस गणित के अनुसार गीत का पाठ आज से 5116 वर्ष पूर्व किया गया… श्री कृष्ण ने अर्जुन को किया… तिथि एकादशी थी… संभवत वो दिन रविवार था…यह ज्ञान लगभग 45 मिनिट तक श्री कृष्ण ने अर्जुन को दिया… गीता महाभारत का एक अंग है एक हिस्सा है, गीता महाभारत मे भीष्म पर्व मे अति है…
गीता मे कुल 700 श्लोक है… जिसमे से 1 श्लोक धृतराष्ट्र ने कहा, 40 संजय ने, 85 अर्जुन ने और 574 श्लोक श्री कृष्ण ने कहे….
गीता प्रारम्भ होने से पहले ही जीवन का सबसे बड़ा ज्ञान दे देती है, गीता कहती है, अगर आप ध्यान से किसी भी बात को सुनते समझते है, मतलब आप अच्छे श्रोता बनते है तो आप उस समस्या का उस प्रश्न का हल निकालने मे सक्षम होंगे, जैसे श्री कृष्ण ने अर्जुन के 85 प्रश्न श्लोक ध्यान से सुने और 574 श्लोक मे उत्तर दिए, अर्थात गीता का पहला ज्ञान किसी की भी बात को पूरी सुने बिना उत्तेजित हुए तभी आप उस बात को समझ के उसका जवाब दे पाएंगे….
गीता का ज्ञान अर्जुन को श्री कृष्ण ने क्योँ दिया???? जिस समय अर्जुन युद्ध के मैदान मे थे, वो अपने मार्ग से भटक गए, अपने अस्त्र शस्त्र त्याग दिए और उनका मन बहुत गति से वैराग्य की ओर बह चला… इस अवस्था को जान कर श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया और अपने कर्तव्य पथ पर पुनः ले कर आये… गीता ने सर्वप्रथम अर्जुन के जीवन को सार्थक किया… अनंत का मतलब यही है हमे जहाँ से प्रारंभ मानना है मान ले, मैं इसे अर्जुन के जीवन को सफल बनाने से मान रहा हूँ… और आज अपने और आप के जीवन को सफल करने का माध्यम देख रहा हूँ…. गीता वो गंगा है जिसमे नहाने के बाद, कर्मो के जाले खुद ब खुद जल जाते है, और श्री कृष्ण का मार्ग मिलता है…. राधे राधे… जय श्री कृष्ण…
आप सभी का बहुत बहुत आभार… आप ने मेरे इस ब्लॉग को अपना बहुमूल्य समय दिया… मिलते है अगले लेख मे, श्लोक के साथ, 21 फरबरी को… तब तक के लिए अपना ख्याल रखे, खुश रहे, स्वस्थ रहे…जय श्री कृष्ण राधे राधे…..