महिला दिवस

जय श्री कृष्ण राधे राधे… आप सभी लोगो का स्वागत और अभिनंदन है, श्री मद भगवद गीता में, आज आप सब तो टाइटल पढ़ कर आये है, वो सही है, बिल्कुल सरल तरीका बताऊंगा, कैसे यश कीर्ति और धन कि प्राप्ति करें।

आज 8 मार्च वर्ल्ड वीमेन डे है, सभी श्री शक्तियों को मेरा नमन… हमारे भारतीय समाज में ऐसी कोई परमपरा नही है, उसका कारण है, संस्कार को हम किसी एक दिन तक सीमित नही करते है, और ये पश्च्यात संस्कृति का फायदा भी, की जो हमारे मूल संस्कार है, जिनसे हम दूर होते जा रहे है, कम से कम उस एक दिन उनको याद कर कर के पुनः अपने मूल में वापस आये।

कैसे दूर करे धन अभाव, कैसे अपना यश और कृति बढ़ाये… सिर्फ वक तरीका है और है महिला सम्मान, कैसे इसको जीवन में उतारे और, किस प्रकार ये हमारे जीवन को प्रभावित कर के हमे यश कीर्ति और धन धान्य की ओर ले जाती है, कुछ उद्धरण लेते है

पहला उद्धरण श्री राम कथा रामायण से लेते है, रामायण की कहानी सब को पता है, श्री राम को वनवास हुआ, और माता सीता का हरण कर के रावण, सोने की लंका में ले जाता है, मेरी कहानी यही से परम्भ होती है, अच्छा रावण जब तीनो लोक को जीत चुका था, सोने की लंका बनवा रखा था, रावण का भय हर जगह व्याप्त था, वो अम्रत का पान कर चुका था, मतलब अमर था, सब कुछ था उसके पास फिर क्या जरूरत थी उसको माता सीता का हरण करने की, और जब हरण किया तो उसने क्योँ नही किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या शक्ति प्रयोग किया माता सीता के प्रति, क्योँ लंका की सबसे सुंदर इस्थान लंका में रखा, क्योँ, क्या सोचा है इस बारे में???

रावण ने ऐसा इस लिए कुछ नही किया क्योँकि वो ब्राह्मण था, यहाँ ब्राह्मण से मेरा आशय, ज्ञानि का है, वो परम ज्ञानी था, सब कुछ प्राप्त करने के भी बाद, तीनो लोक जितने के भी बाद उसके पास अभी तक विष्णु लोक नही था, ब्रह्म लोक नही था, ये वो इस्थान है, जो अनंत के परिभाषाक है, तीनो लोक का अंत तो है लेकिन विष्णु लोक का नही, वो अनंत है चिर है, इस्थाई है, रावण जनता था माता सीता माँ लक्ष्मी का अवतार है, और सिर्फ माँ लक्ष्मी की कृपा से वो वो अनंत कीर्ति पा सकता था, रावण ने बहुत प्रयास किया कि माता उसे एक नज़र देख भर ले, वो अपने प्रयोजन में सफल हों जाएगा…

रावण के पतन का कारण भी यही था, माता लक्ष्मी का माता सीता का ह्रदय विदीर्ण कर देना, मन दुखा देना, जब लक्ष्मी आप पर प्रश्न होती है, आप को सब कुछ खुद ब खुद मिल जाता है, लेकिन जब उनका कोमल हृदय क्रोध या मलिनता से ग्रषित होता है तो कुल तक का सर्वनाश हो जाता है, यही हुआ अम्रत का पान करने वाले रावण का भी, उसका दोष सिर्फ इतना था माता सीता की इच्छा के विरुद्ध उसने ये कार्य किया और, अपना नाश किया, विजय उसी की होती है जिस पर माता लक्ष्मी की दृष्टि होती है।

दूसरी कहानी मेरी महाभारत से है, विश्व का सबसे बड़ा युद्ध और सम्पूर्ण विरो से पृथवी खाली हो गयी उन 18 दिनों में, इस युद्ध का भी परम्भ इस्त्री अपमान से हुआ, द्रोपदी कुल वधु, श्री शक्ति स्वरूप इस्री का अपमान भारी सभा में, और परिणाम क्या रहा सम्पूर्ण कुल का नाश…

इसके प्रतिउत्तर श्री राम मर्यादा पुरषोत्तम राम बने, और पाण्डवा कि कीर्ति अनंत हुई, इसके पर एक और उद्धरण, श्री राम भक्त हनुमान को, माता सीता का वरदान, अष्ट सिद्धि नाव निधि के दाता अस वर दीन जानकी माता, माँ आप पर प्रसन्न हो जाये तो वो एक पल में वो वरदान दे देती है, उसकी दाता बना देती है जिसको पाने की कामना, देवता तक करते और उनके लिए भी दुर्गम है।

श्री का मतलब जानते है आप सब, श्री का सम्बोधन माता लक्ष्मी से है, और यही श्री जब किसी के नाम के आगे लग जाती है तो उसका सम्मान खुद बखुद बढ़ जाता है…. धन यश शक्ति ज्ञान सब की दैवीय है, सिर्फ देवियां।

हमारे जीवन में कैसे धन प्राप्त करे अपने दरीदया को कैसे दूर करे, हमारी लक्ष्मी हमारी माँ है, हमारी बेटी है, हमारी पत्नी है, रास्ते पर चलती हर वो इस्त्री हमरे साथ हमारे आफिस में साथ काम करने वाली महिला, सब सम्मान के योग्य है, आप सब को माता लक्ष्मी माता दुर्गा और माता स्वरस्ती की निगह से देखना परम्भ करे, 90 दिन तक ये प्रयास करे, और अपने जीवन में परिवर्तन को महसूस करे… हमारे समाज में महिलाओं को शनेह और सुरक्षा और सम्मान की जरूरत है, और प्रकति के नियम ही आप कुछ भी देते हो कुछ भी बोते हो उसका फल प्राप्त होगा आप को, आप ने बाबुल बोए है, कांटे मिलेंगे आप ने फल का पेड़ लगया है, आप को फल मिलेगा, निर्णय आप का है, मेरी तरफ से उस श्री को शक्ति को और स्वरस्ती को नमन…

मिलते है अपने अगले वीडियो में तब तक के लिए माँ स्वरस्वती आप को ज्ञान की ओर ले जाये, माँ अम्बे आप को शक्ति सम्प्पन करे, और माँ लक्ष्मी आप के धनधान्य और कीर्ति में व्रद्धि करे… नमो अम्बे…

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